नीट पीजी प्रवेश : ग्रामीण क्षेत्र के डॉक्टरों को बोनस अंक पर रोक



जयपुर | हाईकोर्ट ने नीट पीजी-2019 में प्रवेश मामले में ग्रामीण क्षेत्रों में सेवारत डॉक्टरों को बोनस अंक देने पर रोक लगा दी है। साथ ही राज्य सरकार को प्रदेश में ग्रामीण क्षेत्र तय करने के लिए विशेषज्ञों की कमेटी गठित करने की छूट दी है। अदालत ने हिदायत दी है कि इससे नीट पीजी 2019 में प्रवेश का कैलेंडर प्रभावित नहीं हो। अदालत ने यह आदेश कमलेन्द्र सिंह चौधरी की याचिका पर दिया। एडवोकेट पूर्वी माथुर ने बताया कि प्रार्थी एमबीबीएस है और नीट पीजी-2019 की प्रवेश प्रक्रिया में भाग ले रहे हैं। राज्य सरकार दूरस्थ, ग्रामीण व दूरदराज क्षेत्र में तीन साल की सेवाएं देने वाले सेवारत डॉक्टर्स को बोनस अंक दे रहे हैं। राज्य सरकार ने अप्रैल 2018 में इसमें ग्रामीण शब्द भी जोड़ दिया और प्रवेश में हर साल की सेवा के आधार पर दस प्रतिशत तक अंक देने का प्रावधान किया। सरकार के इस प्रावधान को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। जवाब में राज्य सरकार ने कहा कि प्रार्थी सेवारत नहीं है, इसलिए प्रावधान को चुनौती देने का उनका कोई आधार नहीं है। उन्होंने 28 फरवरी 2018 की बोनस अंक देने की अधिसूचना को चुनौती नहीं दी थी। बोनस अंक उन्हें दिए जा रहे हैं जिन्हें ग्रामीण भत्ता मिल रहा है और जो ग्रामीण क्षेत्र में हैं। इसलिए प्रार्थी की याचिका खारिज की जाए। अदालत ने कहा कि सरकार की दलीलें प्रार्थी के इस मुद्दे को चुनौती देने के संबंध में बताए गए आधार पर सही नहीं है, क्योंकि इससे उनका प्रवेश प्रभावित हो रहा है। बोनस अंक के लिए ग्रामीण क्षेत्र को लापरवाही से तय किया है। अदालत ने याचिका मंजूर करते हुए ग्रामीण क्षेत्र में कार्यरत डॉक्टरों को नीट पीजी में बोनस अंक देने पर रोक लगा दी।

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